परिचय

संगीत, स्मृति और
अपनत्व का सफर।

लोक गायिका, शोध और कहानियों से जुड़ी एक संगीत यात्रा।

चंदन तिवारी का मंचीय चित्र
जड़ें और यात्रा

अपनी माटी की आवाज़।

बिहार के भोजपुर जिले के बड़कागांव से जुड़ी चंदन तिवारी झारखंड के बोकारो में पली-बढ़ीं। उनकी लोक गायकी में भोजपुरी, मैथिली, मगही, अवधी, नागपुरी और हिंदी सहित कई भाषाओं की परंपराएं मिलती हैं।

उनका काम लोकगीतों की प्रस्तुति के साथ कम सुने गए गीतों और रचनाकारों की खोज से भी जुड़ा है। पुरबियातान इस यात्रा का संगीत मंच है, जहां परंपरा अपने संदर्भ और संवेदना के साथ श्रोताओं तक पहुंचती है।

नदी, ऋतु, विवाह, मातृत्व, खेती, गांधी और साझा संस्कृति उनके संगीत संसार के कई विषयों में शामिल हैं।

संगीत की दुनिया में जाएं
PURABIYATAAN

परंपरा से आज के श्रोता तक।

पुरबियातान के संग्रह में लोक की अनेक विधाओं और विषयों से जुड़ी प्रस्तुतियां हैं। किसी गीत के शब्दों, उसके रचनाकार और उसकी पृष्ठभूमि को समझना सुनने के अनुभव को और समृद्ध करता है।

संगीत की इस यात्रा में गीतों का दस्तावेजीकरण, दुर्लभ लोक कविता की खोज और अलग-अलग समुदायों के साथ संवाद भी महत्वपूर्ण हैं।

लोक संग्रह देखें
सम्मान

काम की पहचान।

लोक संगीत में योगदान के लिए मिले सम्मान।

सम्मान देखें
2018

उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा पुरस्कार

संगीत नाटक अकादमी · लोक संगीत, बिहार। इस पुरस्कार की घोषणा जुलाई 2019 में हुई।

2019

बिहार कला सम्मान

विंध्यवासिनी देवी सम्मान · बिहार सरकार।

लोक के साथ एक सतत यात्रा

प्रस्तुतियां, गीतों की खोज और श्रोताओं से संवाद।

अपने आयोजन में लोक की आवाज़ को जगह दें।

अपने आयोजन, श्रोताओं और विचार के बारे में हमें बताइए।

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